दूरस्थ शिक्षा की प्रशासनिक व्यवस्थाओं की चुनौतियाँ: वैचारिक अंतर्दृष्टि

लेखक

  • राहुल यादव शोध छात्र, शिक्षाशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ ##default.groups.name.author##
  • डॉo देवेंद्र कुमार यादव सहायक आचार्य, शिक्षाशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ ##default.groups.name.author##

##semicolon##

https://doi.org/10.71126/nijms.v2i1.92

सार

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में शिक्षा को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाना केवल शैक्षिक नीतियों का प्रश्न नहीं बल्कि एक मज़बूत प्रशासनिक ढाँचे और प्रशासकों का भी उत्तरदायित्व होता है तथा मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा इस लक्ष्य को प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम है किंतु इसके समुचित संचालन और व्यवस्थापन में अनेक प्रशासनिक बाधाएँ सामने आती हैं । इस अध्ययन का उद्देश्य इन्हीं चुनौतियों की पहचान करना और उनके समाधान हेतु व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करना है । इस लेख में द्वितीयक आंकड़ों का प्रयोग किया गया है, जो विभिन्न ऑनलाइन प्रति स्रोतों से संकलित है, साथ ही साथ शैक्षिक प्रशासन और नेतृत्व से संबंधित पूर्ववर्ती शोधों को आधार बनाया गया है । परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा के सुचारु संचालन में प्रमुख अवरोधों जैसे प्रशासनिक समन्वय का अभाव, तकनीकी संसाधनों और संयोजकता की कमी, प्रशिक्षित कर्मचारियों का अभाव, शिक्षार्थी सहायता सेवाओं की कमजोरी, शिक्षार्थियों की प्रतिधारण क्षमता में गिरावट, कार्यभार की अधिकता, शिक्षार्थी सहभागिता में कमी, वित्तीय और नियामक संस्थाओं एवं तकनीकी अवसंरचना (ई-लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म, वर्चुअल कक्षाएँ, डिजिटल कंटेंट और मूल्यांकन प्रणाली) को पर्याप्त रूप से विकसित न कर पाना एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरता है । परिणामस्वरूप मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता प्रभावित होती है तथा शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के बीच असंतोष की स्थिति उत्पन्न होती है । यह कहा जा सकता है कि यदि मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा की प्रशासनिक संरचना को पारदर्शी, उत्तरदायी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जाए तो इन चुनौतियाँ को अवसरों में परिवर्तित किया जा सकता हैं, जिससे वर्तमान शिक्षा प्रणाली में प्रभावी नेतृत्व, सतत प्रशिक्षण, वित्तीय अनुशासन, प्रौद्योगिकी का स्थायी उपयोग और विद्यार्थी-केंद्रित नीतियों को अपनाकर इस शिक्षा प्रणाली को अधिक गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है एवं शिक्षा अपने वास्तविक उद्देश्यों को सर्वसुलभ और समावेशन द्वारा प्राप्त करने में सफल सिद्ध होगी ।
मुख्य शब्द : प्रशासनिक चुनौती, शिक्षार्थी प्रबंधन चुनौती, प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचा, संकाय कर्मचारी प्रबंध ।

##submission.downloads##

प्रकाशित

2025-09-30